अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लखन कहे कछु बचन कठोरा। बरजि राम पुनि मोहि निहोरा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दलक्ष्मणजीने कुछ कठोर वचन कहे। किन्तु श्रीरामजीने उन्हें बरजकर फिर मुझसे अनुरोध किया और बार-बार अपनी सौगंध दिलायी [और कहा—] हे तात! लक्ष्मणका लड़कपन वहाँ न कहना॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 470 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
लखन कहे कछु बचन कठोरा। बरजि राम पुनि मोहि निहोरा।।
बार बार निज सपथ देवाई। कहबि न तात लखन लरिकाई।।
स्रोत अभिलेख 2.152 · पुस्तक पृ. 470, 470
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 लखन कहे कछु बचन कठोरा। बरजि राम पुनि मोहि निहोरा।।
English explanation
Lakshmana spoke some harsh words. Rama restrained him and then entreated me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखन | लक्ष्मण; राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| कहे | कहे | spoke |
| कछु | कुछ | some |
| बचन | वचन; बातें | words |
| कठोरा | कठोर | harsh |
| बरजि | रोककर | having restrained him |
| राम | राम | Rama |
| पुनि | फिर | then |
| मोहि | मुझसे | to me |
| निहोरा | विनती की | entreated |
2 बार बार निज सपथ देवाई। कहबि न तात लखन लरिकाई।।
English explanation
Rama repeatedly bound me by an oath in his name, saying: Dear sir, do not report Lakshmana’s childish words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार; पुनः | after time |
| निज | अपनी | his own |
| सपथ | शपथ; सौगंध | oath |
| देवाई | दिलाई | made me swear |
| कहबि | कहना; बताना | report |
| न | मत | do not |
| तात | हे तात | dear sir |
| लखन | लक्ष्मण की | Lakshmana’s |
| लरिकाई | बालसुलभ बातें या व्यवहार | childish words or behavior |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.152
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 470
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 470, 470
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