अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रितु बसंत बह त्रिबिध बयारी। सब कहँ सुलभ पदारथ चारी।।
मूल पाठ
रितु बसंत बह त्रिबिध बयारी। सब कहँ सुलभ पदारथ चारी।।
स्त्रक चंदन बनितादिक भोगा। देखि हरष बिसमय बस लोगा।।
स्रोत अभिलेख 2.215 · पुस्तक पृ. 522, 522
भावार्थ
मूल पाठ के बादवसन्त-ऋतु है। शीतल, मन्द, सुगन्ध तीन प्रकारकी हवा बह रही है। सभीको [धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष] चारों पदार्थ सुलभ हैं। माला, चन्दन, स्त्री आदिक भोगोंको देखकर सब लोग हर्ष और विषादके वश हो रहे हैं। [हर्ष तो भोग-सामग्रियोंको और मुनिके तप:प्रभावको देखकर होता है और विषाद इस बातसे होता है कि श्रीरामके वियोगमें नियम-व्रतसे रहनेवाले हमलोग भोग-विलासमें क्यों आ फँसे; कहीं इनमें आसक्त होकर हमारा मन नियम-व्रतोंको न त्याग दे]॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 522 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रितु बसंत बह त्रिबिध बयारी। सब कहँ सुलभ पदारथ चारी।।
English explanation
It was spring, and a cool, gentle, fragrant breeze blew; all four aims of life were readily available to everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रितु | ऋतु | season |
| बसंत | वसंत | spring |
| बह | बह रही थी | was blowing |
| त्रिबिध | तीन गुणोंवाली: शीतल, मंद और सुगंधित | threefold: cool, gentle, and fragrant |
| बयारी | हवा; बयार | breeze |
| सब | सभी | everyone |
| कहँ | के लिए | for |
| सुलभ | सहज उपलब्ध | readily attainable |
| पदारथ | पुरुषार्थ; जीवन के लक्ष्य | aims of life |
| चारी | चारों | all four |
2 स्त्रक चंदन बनितादिक भोगा। देखि हरष बिसमय बस लोगा।।
English explanation
Seeing garlands, sandalwood, women, and other sources of enjoyment, the people were overcome with joy and wonder.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्त्रक | फूलों की मालाएँ | flower garlands |
| चंदन | चंदन; चंदन का लेप | sandalwood; sandalwood paste |
| बनितादिक | स्त्रियाँ आदि | women and the like |
| भोगा | भोग-साधन | sources of enjoyment |
| देखि | देखकर | on seeing |
| हरष | आनंद | joy |
| बिसमय | आश्चर्य | wonder |
| बस | के वश में | overcome by |
| लोगा | लोग | the people |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.215
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 522
- सहायक विषय
- भरद्वाजद्वारा भरतका सत्कार
- मुद्रित पृष्ठ
- 522, 522
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।