अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
असन पान सुच अमिअ अमी से। देखि लोग सकुचात जमी से।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतथा अमृतके भी अमृत-सरीखे पवित्र खान-पानके पदार्थ थे, जिन्हें देखकर सब लोग संयमी पुरुषों (विरक्त मुनियों) की भाँति सकुचा रहे हैं। सभीके डेरोंमें [मनोवाञ्छित वस्तु देनेवाले] कामधेनु और कल्पवृक्ष हैं, जिन्हें देखकर इन्द्र और इन्द्राणीको भी अभिलाषा होती है (उनका भी मन ललचा जाता है)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 522 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
असन पान सुच अमिअ अमी से। देखि लोग सकुचात जमी से।।
सुर सुरभी सुरतरु सबही कें। लखि अभिलाषु सुरेस सची कें।।
स्रोत अभिलेख 2.215 · पुस्तक पृ. 522, 522
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 असन पान सुच अमिअ अमी से। देखि लोग सकुचात जमी से।।
English explanation
The food and drink were pure, delicious, and nectar-like; seeing them, the diners felt abashed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| असन | भोजन | food |
| पान | पेय पदार्थ | drinks |
| सुच | शुद्ध; पवित्र | pure; clean |
| अमिअ | अत्यंत स्वादिष्ट | delicious; nectar-like |
| अमी | अमृत | nectar |
| से | जैसे | like |
| देखि | देखकर | on seeing |
| लोग | लोग | people |
| सकुचात | संकोच कर रहे थे | felt abashed |
| जमी | भोजन करनेवाले; खानेवाले | diners; eaters |
| से | के रूप में; जैसे | as; like |
2 सुर सुरभी सुरतरु सबही कें। लखि अभिलाषु सुरेस सची कें।।
English explanation
Seeing everyone supplied with heavenly wish-fulfilling cows and trees, even Indra and Shachi felt longing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवताओं की; दिव्य | heavenly; belonging to the gods |
| सुरभी | कामधेनु; इच्छापूर्ति करनेवाली गाय | the wish-fulfilling celestial cow |
| सुरतरु | कल्पवृक्ष; इच्छापूर्ति करनेवाला दिव्य वृक्ष | the wish-fulfilling celestial tree |
| सबही | सभी के | everyone’s |
| कें | पास; यहाँ | with; in the possession of |
| लखि | देखकर | on seeing |
| अभिलाषु | लालसा; पाने की इच्छा | longing; desire |
| सुरेस | देवराज इंद्र | Indra, king of the gods |
| सची | इंद्र की पत्नी शची | Shachi, Indra’s wife |
| कें | के मन में | in their hearts |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.215
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 522
- सहायक विषय
- भरद्वाजद्वारा भरतका सत्कार
- मुद्रित पृष्ठ
- 522, 522
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।