अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम सनेह मगन सब जाने। कहि प्रिय बचन सकल सनमाने।।
मूल पाठ
राम सनेह मगन सब जाने। कहि प्रिय बचन सकल सनमाने।।
प्रभुहि जोहारि बहोरि बहोरी। बचन बिनीत कहहिं कर जोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.135 · पुस्तक पृ. 456, 456
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीने उन सबको प्रेममें मग्र जाना, और प्रिय वचन कहकर सबका सम्मान किया। वे बार-बार प्रभु श्रीरामचन्द्रजीको जोहार करते हुए हाथ जोड़कर विनीत वचन कहते हैं—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 456 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम सनेह मगन सब जाने। कहि प्रिय बचन सकल सनमाने।।
English explanation
Rama recognized that all were absorbed in love and honored everyone with kind words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम ने | Rama |
| सनेह | प्रेम में | in love |
| मगन | डूबे हुए | absorbed |
| सब | सभी को | everyone |
| जाने | जाना; समझा | recognized |
| कहि | कहकर | having spoken |
| प्रिय | प्यारे; स्नेहपूर्ण | kind, affectionate |
| बचन | वचन | words |
| सकल | सभी का | all of them |
| सनमाने | सम्मान किया | honored |
2 प्रभुहि जोहारि बहोरि बहोरी। बचन बिनीत कहहिं कर जोरी।।
English explanation
Saluting the Lord again and again, they speak humbly with folded hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभुहि | प्रभु राम को | the Lord Rama |
| जोहारि | प्रणाम करके | having saluted |
| बहोरि | फिर | again |
| बहोरी | फिर | again |
| बचन | वचन | words |
| बिनीत | विनम्र | humble |
| कहहिं | कहते हैं | speak |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having folded |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.135
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 456
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 456, 456
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