अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम सदा सेवक रुचि राखी। बेद पुरान साधु सुर साखी।।
मूल पाठ
राम सदा सेवक रुचि राखी। बेद पुरान साधु सुर साखी।।
अस जियँ जानि तजहु कुटिलाई। करहु भरत पद प्रीति सुहाई।।
स्रोत अभिलेख 2.219 · पुस्तक पृ. 525, 526
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजी सदा अपने सेवकों (भक्तों) की रुचि रखते आये हैं। वेद, पुराण, साधु और देवता इसके साक्षी हैं। ऐसा हृदयमें जानकर कुटिलता छोड़ दो और भरतजीके चरणोंमें सुन्दर प्रीति करो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 526 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम सदा सेवक रुचि राखी। बेद पुरान साधु सुर साखी।।
English explanation
Rama has always honored his servant’s wishes. The Vedas, Puranas, holy people, and gods bear witness to this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम ने | Rama |
| सदा | सदा | always |
| सेवक | सेवक की | his servant’s |
| रुचि | इच्छा; अभिलाषा | wish; desire |
| राखी | मान रखा; पूरी की | honored; fulfilled |
| बेद | वेद | the Vedas |
| पुरान | पुराण | the Puranas |
| साधु | संत; साधुजन | saints; holy people |
| सुर | देवता | gods |
| साखी | साक्षी हैं | are witnesses |
2 अस जियँ जानि तजहु कुटिलाई। करहु भरत पद प्रीति सुहाई।।
English explanation
Knowing this in your heart, abandon deceit and cherish sincere, lovely affection for Bharata’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा; यह | this; thus |
| जियँ | हृदय में | in your heart |
| जानि | जानकर | having understood |
| तजहु | त्यागो | abandon |
| कुटिलाई | कुटिलता; छल | crookedness; deceit |
| करहु | करो; रखो | cultivate; cherish |
| भरत | भरत के; राम के भाई के | of Bharata, Rama’s brother |
| पद | चरणों में | toward the feet |
| प्रीति | प्रेम | love; affection |
| सुहाई | सुंदर; शुभ | lovely; noble |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.219
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 526
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 525, 526
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।