अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तदपि करहिं सम बिषम बिहारा। भगत अभगत हृदय अनुसारा।।
मूल पाठ
तदपि करहिं सम बिषम बिहारा। भगत अभगत हृदय अनुसारा।।
अगुन अलेप अमान एकरस। रामु सगुन भए भगत पेम बस।।
स्रोत अभिलेख 2.219 · पुस्तक पृ. 525, 526
भावार्थ
मूल पाठ के बादतथापि वे भक्त और अभक्तके हृदयके अनुसार सम और विषम व्यवहार करते हैं (भक्तको प्रेमसे गले लगा लेते हैं और अभक्तको मारकर तार देते हैं)। गुणरहित, निर्लेप, मानरहित और सदा एकरस भगवान् श्रीराम भक्तके प्रेमवश ही सगुण हुए हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 526 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तदपि करहिं सम बिषम बिहारा। भगत अभगत हृदय अनुसारा।।
English explanation
Nevertheless, he acts alike or differently according to the hearts of devotees and non-devotees.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| करहिं | करते हैं | does; performs |
| सम | समान | equal; alike |
| बिषम | भिन्न; असमान | different; unequal |
| बिहारा | व्यवहार; आचरण | conduct; dealings |
| भगत | भक्त के | of the devotee |
| अभगत | अभक्त के | of the non-devotee |
| हृदय | हृदयभाव | heart; inner disposition |
| अनुसारा | के अनुसार | according to |
2 अगुन अलेप अमान एकरस। रामु सगुन भए भगत पेम बस।।
English explanation
Rama, beyond qualities, unattached, free of pride, and unchanging, became manifest with qualities under the sway of his devotees’ love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अगुन | निर्गुण; गुणों से परे | beyond qualities; attributeless |
| अलेप | निर्लिप्त; आसक्ति से रहित | unattached; unaffected |
| अमान | अहंकाररहित | free of pride |
| एकरस | सदा समान; अपरिवर्तित | unchanging; ever the same |
| रामु | राम | Rama |
| सगुन | गुणों और रूप से युक्त | manifest with qualities and form |
| भए | हुए | became |
| भगत | भक्तों के | the devotees’ |
| पेम | प्रेम | love |
| बस | के वश में | under the sway of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.219
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 526
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 525, 526
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।