अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जद्यपि सम नहिं राग न रोषू। गहहिं न पाप पूनु गुन दोषू।।
मूल पाठ
जद्यपि सम नहिं राग न रोषू। गहहिं न पाप पूनु गुन दोषू।।
करम प्रधान बिस्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फलु चाखा।।
स्रोत अभिलेख 2.219 · पुस्तक पृ. 525, 526
भावार्थ
मूल पाठ के बादयद्यपि वे सम हैं—उनमें न राग है, न रोष है। और न वे किसीका पाप-पुण्य और गुण- दोष ही ग्रहण करते हैं। उन्होंने विश्वमें कर्मको ही प्रधान कर रखा है। जो जैसा करता है, वह वैसा ही फल भोगता है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 525 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जद्यपि सम नहिं राग न रोषू। गहहिं न पाप पूनु गुन दोषू।।
English explanation
Although Rama is impartial, without attachment or anger, he does not take on sin or merit, virtues or faults.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| सम | समभाव वाले; निष्पक्ष | impartial; even-minded |
| नहिं | नहीं | not; no |
| राग | आसक्ति | attachment |
| न | न | nor |
| रोषू | क्रोध | anger |
| गहहिं | ग्रहण करते हैं | takes on; accepts |
| न | नहीं | not |
| पाप | पाप | sin |
| पूनु | पुण्य | merit |
| गुन | गुण | virtues |
| दोषू | दोष | faults |
2 करम प्रधान बिस्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फलु चाखा।।
English explanation
He has ordered the world so that action governs it. Whoever acts in a certain way experiences a corresponding result.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करम | कर्म; किए गए कार्य | action; deeds |
| प्रधान | प्रधान; निर्णायक | primary; governing |
| बिस्व | संसार को | the world |
| करि | बनाकर | having made |
| राखा | रखा है | has established |
| जो | जो कोई | whoever |
| जस | जैसा | in whatever way |
| करइ | करता है | acts; does |
| सो | वह | that person |
| तस | वैसा | corresponding; like that |
| फलु | फल; परिणाम | fruit; result |
| चाखा | चखता है; भोगता है | tastes; experiences |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.219
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 525
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 525, 526
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।