अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु सुरेस उपदेसु हमारा। रामहि सेवकु परम पिआरा।।
मूल पाठ
सुनु सुरेस उपदेसु हमारा। रामहि सेवकु परम पिआरा।।
मानत सुखु सेवक सेवकाई। सेवक बैर बैरु अधिकाई।।
स्रोत अभिलेख 2.219 · पुस्तक पृ. 525, 526
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे देवराज! हमारा उपदेश सुनो। श्रीरामजीको अपना सेवक परम प्रिय है। वे अपने सेवककी सेवासे सुख मानते हैं और सेवकके साथ वैर करनेसे बड़ा भारी वैर मानते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 525 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनु सुरेस उपदेसु हमारा। रामहि सेवकु परम पिआरा।।
English explanation
AI draft: Listen to our counsel, Indra, king of the gods. A servant is exceedingly dear to Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| सुरेस | हे देवराज इंद्र | O Indra, king of the gods |
| उपदेसु | उपदेश; सलाह | counsel; advice |
| हमारा | हमारा | our |
| रामहि | राम को | to Rama |
| सेवकु | सेवक; भक्त | servant; devotee |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| पिआरा | प्रिय | dear |
2 मानत सुखु सेवक सेवकाई। सेवक बैर बैरु अधिकाई।।
English explanation
Rama finds joy in a servant’s service and regards hostility toward his servant as greater than hostility toward himself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मानत | मानते हैं | regards; considers |
| सुखु | सुख; आनंद | joy; pleasure |
| सेवक | सेवक की | the servant’s |
| सेवकाई | सेवा | service |
| सेवक | सेवक से | toward the servant |
| बैर | शत्रुता | hostility |
| बैरु | बैर; अपने प्रति शत्रुता | enmity; hostility toward himself |
| अधिकाई | अधिक; बढ़कर | greater; more serious |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.219
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 525
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 525, 526
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।