अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम लखन सिय रूप निहारी। कहहिं सप्रेम ग्राम नर नारी।।
मूल पाठ
राम लखन सिय रूप निहारी। कहहिं सप्रेम ग्राम नर नारी।।
ते पितु मातु कहहु सखि कैसे। जिन्ह पठए बन बालक ऐसे।।
स्रोत अभिलेख 2.89 · पुस्तक पृ. 417, 417
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजी, लक्ष्मणजी और सीताजीके रूपको देखकर गाँवके स्त्री-पुरुष प्रेमके साथ चर्चा करते हैं। [कोई कहती है—] हे सखी! कहो तो, वे माता-पिता कैसे हैं, जिन्होंने ऐसे [सुन्दर सुकुमार] बालकोंको वनमें भेज दिया है!॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 417 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम लखन सिय रूप निहारी। कहहिं सप्रेम ग्राम नर नारी।।
English explanation
Seeing the beauty of Rama, Lakshmana, and Sita, the village men and women speak with affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम | Rama |
| लखन | लक्ष्मण, राम के भाई | Lakshmana, Rama’s brother |
| सिय | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| रूप | सुंदर स्वरूप | beautiful appearance |
| निहारी | देखकर | having beheld |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| सप्रेम | प्रेमपूर्वक | with affection |
| ग्राम | गाँव के | of the village |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
2 ते पितु मातु कहहु सखि कैसे। जिन्ह पठए बन बालक ऐसे।।
English explanation
Tell me, friend, what sort of parents are they who sent such children into the forest?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | those |
| पितु | पिता | father |
| मातु | माता | mother |
| कहहु | बताओ | tell me |
| सखि | हे सखी | O female friend |
| कैसे | कैसे हैं | what sort are they |
| जिन्ह | जिन्होंने | who |
| पठए | भेजे | sent |
| बन | वन में | into the forest |
| बालक | बालकों को | children |
| ऐसे | ऐसे सुंदर | such beautiful |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.89
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 417
- सहायक विषय
- श्रीरामका शृङ्गवेरपुर पहुँचना, निषादके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 417, 417
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