अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम राम सिय लखन पुकारी। परेउ धरनितल ब्याकुल भारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[निषादको अकेले आया देखकर] सुमन्त्र हा राम! हा राम! हा सीते! हा लक्ष्मण! पुकारते हुए, बहुत व्याकुल होकर धरतीपर गिर पड़े। [रथके] घोड़े दक्षिण दिशाकी ओर [जिधर श्रीरामचन्द्रजी गये थे] देख-देखकर हिनहिनाते हैं। मानो बिना पंखके पक्षी व्याकुल हो रहे हों॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 462 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम राम सिय लखन पुकारी। परेउ धरनितल ब्याकुल भारी।।
देखि दखिन दिसि हय हिहिनाहीं। जनु बिनु पंख बिहग अकुलाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.142 · पुस्तक पृ. 461, 462
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम राम सिय लखन पुकारी। परेउ धरनितल ब्याकुल भारी।।
English explanation
Crying out, ‘Rama! Rama! Sita! Lakshmana!’ Sumantra fell to the ground in great distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | हे राम! | O Rama! |
| राम | हे राम! | O Rama! |
| सिय | हे सीता! | O Sita! |
| लखन | हे लक्ष्मण! | O Lakshmana! |
| पुकारी | पुकारकर | crying out |
| परेउ | गिर पड़े | fell |
| धरनितल | धरती पर | onto the ground |
| ब्याकुल | व्याकुल | distressed |
| भारी | अत्यंत | extremely |
2 देखि दखिन दिसि हय हिहिनाहीं। जनु बिनु पंख बिहग अकुलाहीं।।
English explanation
Looking toward the south, the horses neigh, as though they were birds struggling without wings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | looking toward |
| दखिन | दक्षिण | southern |
| दिसि | दिशा | direction |
| हय | घोड़े | horses |
| हिहिनाहीं | हिनहिनाते हैं | neigh |
| जनु | मानो | as though |
| बिनु | बिना | without |
| पंख | पंखों के | wings |
| बिहग | पक्षी | birds |
| अकुलाहीं | छटपटाते हैं | struggle in distress |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.142
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 462
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 461, 462
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।