अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम राम कहि जे जमुहाहीं। तिन्हहि न पाप पुंज समुहाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो लोग राम-राम कहकर जँभाई लेते हैं (अर्थात् आलस्यसे भी जिनके मुँहसे रामनामका उच्चारण हो जाता है), पापोंके समूह (कोई भी पाप) उनके सामने नहीं आते। फिर इस गुहको तो स्वयं श्रीरामचन्द्रजीने हृदयसे लगा लिया और कुलसमेत इसे जगत्पावन (जगत्को पवित्र करनेवाला) बना दिया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 504 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम राम कहि जे जमुहाहीं। तिन्हहि न पाप पुंज समुहाहीं।।
यह तौ राम लाइ उर लीन्हा। कुल समेत जगु पावन कीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 2.194 · पुस्तक पृ. 504, 504
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम राम कहि जे जमुहाहीं। तिन्हहि न पाप पुंज समुहाहीं।।
English explanation
Even those who say “Rama, Rama” while yawning are not confronted by masses of sins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम का नाम ‘राम’ | Rama’s name, “Rama” |
| राम | फिर ‘राम’; नाम की पुनरुक्ति | “Rama” again; repeated invocation |
| कहि | कहकर | saying |
| जे | जो लोग | those who |
| जमुहाहीं | जँभाई लेते हैं | yawn |
| तिन्हहि | उनके सामने; उन्हीं को | before them; those very people |
| न | नहीं | not |
| पाप | पापों के | of sins |
| पुंज | समूह | masses; heaps |
| समुहाहीं | सामने आते; सामना करते हैं | come before; confront |
2 यह तौ राम लाइ उर लीन्हा। कुल समेत जगु पावन कीन्हा।।
English explanation
Rama has indeed clasped this Nishada chief to his heart and made him, together with his family, pure in the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह; यह निषादराज | this man; this Nishada chief |
| तौ | तो; बल देने वाला अव्यय | indeed; emphatic particle |
| राम | श्रीराम ने | Rama |
| लाइ | लगाकर | bringing close; clasping |
| उर | हृदय से; छाती से | to his heart; to his chest |
| लीन्हा | ले लिया | took; received |
| कुल | परिवार; वंश | family; lineage |
| समेत | सहित | together with |
| जगु | संसार में | in the world |
| पावन | पवित्र | pure |
| कीन्हा | कर दिया | made |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.194
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 504
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 504, 504
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।