अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लोक बेद सब भाँतिहिं नीचा। जासु छाँह छुइ लेइअ सींचा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[वे कहते हैं—] जो लोक और वेद दोनोंमें सब प्रकारसे नीचा माना जाता है, जिसकी छायाके छू जानेसे भी स्नान करना होता है, उसी निषादसे अँकवार भरकर (हृदयसे चिपटाकर) श्रीरामचन्द्रजीके छोटे भाई भरतजी [आनन्द और प्रेमवश] शरीरमें पुलकावलीसे परिपूर्ण हो मिल रहे हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 504 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
लोक बेद सब भाँतिहिं नीचा। जासु छाँह छुइ लेइअ सींचा।।
तेहि भरि अंक राम लघु भ्राता। मिलत पुलक परिपूरित गाता।।
स्रोत अभिलेख 2.194 · पुस्तक पृ. 504, 504
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लोक बेद सब भाँतिहिं नीचा। जासु छाँह छुइ लेइअ सींचा।।
English explanation
One regarded as low in every respect by social and Vedic norms, whose very shadow, if touched, calls for sprinkling water for purification—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोक | लोकाचार; समाज की दृष्टि | social custom; society’s view |
| बेद | वेद; वैदिक मान्यता | the Vedas; Vedic norms |
| सब | सभी | every |
| भाँतिहिं | प्रकार से ही | in every way |
| नीचा | नीचा माना गया | regarded as low |
| जासु | जिसकी | whose |
| छाँह | छाया | shadow |
| छुइ | छूकर; छू जाने पर | on touching; upon contact |
| लेइअ | लेना पड़ता है; लिया जाता है | one must take; is taken |
| सींचा | जल का छिड़काव | sprinkling with water |
2 तेहि भरि अंक राम लघु भ्राता। मिलत पुलक परिपूरित गाता।।
English explanation
Rama’s younger brother Bharata embraces that very man, his body covered with the thrill of affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उसी को; निषादराज को | that very man; Guha |
| भरि | भरकर | drawing fully into |
| अंक | गोद; यहाँ बाँहों का आलिंगन | embrace; arms |
| राम | श्रीराम के | of Rama |
| लघु | छोटे | younger |
| भ्राता | भाई; यहाँ भरत | brother; here, Bharata |
| मिलत | मिलते हैं | meets; embraces |
| पुलक | रोमांच | thrill; hair standing on end |
| परिपूरित | पूरी तरह भरा हुआ | completely filled |
| गाता | शरीर | body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.194
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 504
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 504, 504
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।