अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भेंटत भरतु ताहि अति प्रीती। लोग सिहाहिं प्रेम कै रीती।।
मूल पाठ
भेंटत भरतु ताहि अति प्रीती। लोग सिहाहिं प्रेम कै रीती।।
धन्य धन्य धुनि मंगल मूला। सुर सराहि तेहि बरिसहिं फूला।।
स्रोत अभिलेख 2.194 · पुस्तक पृ. 504, 504
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजी गुहको अत्यन्त प्रेमसे गले लगा रहे हैं। प्रेमकी रीतिको सब लोग सिहा रहे हैं (ईष्र्यापूर्वक प्रशंसा कर रहे हैं), मङ्गलकी मूल 'धन्य-धन्य की ध्वनि करके देवता उसकी सराहना करते हुए फूल बरसा रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 504 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भेंटत भरतु ताहि अति प्रीती। लोग सिहाहिं प्रेम कै रीती।।
English explanation
Bharata meets him with great affection. People admire this manner of love and long for such affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भेंटत | मिलते हैं | meets |
| भरतु | श्रीराम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| ताहि | उससे, निषादराज गुह से | him, Guha, the Nishada chief |
| अति | अत्यंत | very greatly |
| प्रीती | प्रेम से | with affection |
| लोग | लोग | people |
| सिहाहिं | सराहते और पाने की अभिलाषा करते हैं | admire and yearn for |
| प्रेम | प्रेम | love |
| कै | की | of |
| रीती | रीति; ढंग | manner; way |
2 धन्य धन्य धुनि मंगल मूला। सुर सराहि तेहि बरिसहिं फूला।।
English explanation
Auspicious cries of “Blessed! Blessed!” arise. The gods praise him and shower flowers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धन्य | धन्य!; प्रशंसनीय! | Blessed!; Admirable! |
| धन्य | धन्य!; प्रशंसा की पुनरुक्ति | Blessed!; repeated praise |
| धुनि | ध्वनि; पुकार | sound; cries |
| मंगल | मंगल; शुभता | auspiciousness |
| मूला | मूल; उत्पन्न करने वाली | source; giving rise to |
| सुर | देवता | the gods |
| सराहि | प्रशंसा करके | having praised |
| तेहि | उसकी; उस निषादराज की | him; that Nishada chief |
| बरिसहिं | बरसाते हैं | shower |
| फूला | फूल | flowers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.194
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 504
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 504, 504
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।