अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम रजाइ मेट मन माहीं। देखा सुना कतहुँ कोउ नाहीं।।
मूल पाठ
राम रजाइ मेट मन माहीं। देखा सुना कतहुँ कोउ नाहीं।।
सो मैं सब बिधि कीन्हि ढिठाई। प्रभु मानी सनेह सेवकाई।।
स्रोत अभिलेख 2.298 · पुस्तक पृ. 592, 593
भावार्थ
मूल पाठ के बादकिसीको भी कहीं ऐसा नहीं देखा-सुना जो मनमें भी श्रीरामचन्द्रजी (आप) की आज्ञाको मेट दे। मैंने सब प्रकारसे वही ढिठाई की, परन्तु प्रभुने उस ढिठाईको स्नेह और सेवा मान लिया!॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 593 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम रजाइ मेट मन माहीं। देखा सुना कतहुँ कोउ नाहीं।।
English explanation
No one anywhere has been seen or heard of who sets aside Rama's command even in the mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम की | Rama's |
| रजाइ | आज्ञा, इच्छा | command, will |
| मेट | मिटाने वाला, टालने वाला | one who sets aside or overrides |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | within, in |
| देखा | देखा गया | seen |
| सुना | सुना गया | heard of |
| कतहुँ | कहीं भी | anywhere |
| कोउ | कोई | anyone |
| नाहीं | नहीं | not, none |
2 सो मैं सब बिधि कीन्हि ढिठाई। प्रभु मानी सनेह सेवकाई।।
English explanation
I committed that very presumption in every way, yet the Lord regarded it as affection and service.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वही, उस प्रकार की | that very, such |
| मैं | मैंने | I |
| सब | सब, हर | every, all |
| बिधि | प्रकार, रीति | way, manner |
| कीन्हि | की | committed, did |
| ढिठाई | धृष्टता, ढिठाई | presumption, audacity |
| प्रभु | प्रभु ने; श्रीराम ने | the Lord; Rama |
| मानी | माना, समझा | regarded, accepted as |
| सनेह | प्रेम, स्नेह | affection, love |
| सेवकाई | सेवा | service |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.298
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 593
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 592, 593
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