अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम ब्रह्म परमारथ रूपा। अबिगत अलख अनादि अनूपा।।
मूल पाठ
राम ब्रह्म परमारथ रूपा। अबिगत अलख अनादि अनूपा।।
सकल बिकार रहित गतभेदा। कहि नित नेति निरूपहिं बेदा।
स्रोत अभिलेख 2.93 · पुस्तक पृ. 420, 421
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजी परमार्थस्वरूप (परमवस्तु) परब्रह्म हैं। वे अविगत (जाननेमें न आनेवाले), अलख (स्थूल दृष्टिसे देखनेमें न आनेवाले), अनादि (आदिरहित), अनुपम(उपमारहित), सब विकारोंसे रहित और भेदशून्य हैं, वेद जिनका नित्य 'नेति-नेति कहकर निरूपण करते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 420 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम ब्रह्म परमारथ रूपा। अबिगत अलख अनादि अनूपा।।
English explanation
Rama is Brahman, the embodiment of ultimate reality—beyond comprehension, imperceptible, beginningless, and incomparable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम | Rama |
| ब्रह्म | ब्रह्म; परम सत्य | Brahman; absolute reality |
| परमारथ | परम सत्य के | of ultimate reality |
| रूपा | स्वरूप | the embodiment |
| अबिगत | बुद्धि की पहुँच से परे | beyond comprehension |
| अलख | अगोचर; जिन्हें देखा नहीं जा सकता | imperceptible |
| अनादि | जिनका कोई आरंभ नहीं | beginningless |
| अनूपा | अनुपम; अतुलनीय | incomparable |
2 सकल बिकार रहित गतभेदा। कहि नित नेति निरूपहिं बेदा।
English explanation
He is free from all modifications and beyond distinctions; the Vedas continually describe him by saying 'not this'.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सभी | all |
| बिकार | विकारों; परिवर्तनों से | modifications; changes |
| रहित | रहित | free from |
| गतभेदा | भेदों से परे | beyond distinctions |
| कहि | कहकर | by saying |
| नित | निरंतर | continually |
| नेति | यह नहीं | not this |
| निरूपहिं | निरूपण करते हैं | describe |
| बेदा | वेद | the Vedas |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.93
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 420
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 420, 421
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।