अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
होइ बिबेकु मोह भ्रम भागा। तब रघुनाथ चरन अनुरागा।।
मूल पाठ
होइ बिबेकु मोह भ्रम भागा। तब रघुनाथ चरन अनुरागा।।
सखा परम परमारथु एहू। मन क्रम बचन राम पद नेहू।।
स्रोत अभिलेख 2.93 · पुस्तक पृ. 420, 421
भावार्थ
मूल पाठ के बादविवेक होनेपर मोहरूपी भ्रम भाग जाता है, तब (अज्ञानका नाश होनेपर) श्रीरघुनाथजीके चरणोंमें प्रेम होता है। हे सखा! मन, वचन और कर्मसे श्रीरामजीके चरणोंमें प्रेम होना, यही सर्वश्रेष्ठ परमार्थ (पुरुषार्थ) है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 420 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 होइ बिबेकु मोह भ्रम भागा। तब रघुनाथ चरन अनुरागा।।
English explanation
When discernment arises and delusion and confusion depart, love for Lord Rama’s feet arises.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होइ | होता है; उत्पन्न होता है | arises |
| बिबेकु | विवेक; सत्य-असत्य का भेदबोध | discernment |
| मोह | मोह | delusion |
| भ्रम | भ्रम | confusion |
| भागा | दूर हो गया | has departed |
| तब | तब | then |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम के | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| अनुरागा | प्रेम; अनुरक्ति | love; devotion |
2 सखा परम परमारथु एहू। मन क्रम बचन राम पद नेहू।।
English explanation
Friend, this is the highest spiritual aim: love for Rama’s feet in thought, deed, and speech.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखा | हे मित्र | O friend |
| परम | सर्वोच्च | highest |
| परमारथु | आध्यात्मिक लक्ष्य | spiritual aim |
| एहू | यही | this very thing |
| मन | मन से | in thought |
| क्रम | कर्म से | in deed |
| बचन | वचन से | in speech |
| राम | राम के | of Rama |
| पद | चरणों में | at the feet |
| नेहू | प्रेम | love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.93
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 420
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 420, 421
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।