अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम बास थल बिटप बिलोकें। उर अनुराग रहत नहिं रोकैं।।
मूल पाठ
राम बास थल बिटप बिलोकें। उर अनुराग रहत नहिं रोकैं।।
दैखि दसा सुर बरिसहिं फूला। भइ मृदु महि मगु मंगल मूला।।
स्रोत अभिलेख 2.216 · पुस्तक पृ. 523, 523
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीके ठहरनेकी जगहों और वृक्षोंको देखकर उनके हृदयमें प्रेम रोके नहीं रुकता। भरतजीकी यह दशा देखकर देवता फूल बरसाने लगे। पृथ्वी कोमल हो गयी और मार्ग मङ्गलका मूल बन गया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 523 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम बास थल बिटप बिलोकें। उर अनुराग रहत नहिं रोकैं।।
English explanation
On seeing the places and trees where Rama had stayed, the love in Bharata’s heart could not be restrained even when he tried.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | Rama’s |
| बास | ठहरने के | of lodging; of staying |
| थल | स्थान | places |
| बिटप | वृक्ष | trees |
| बिलोकें | देखने पर | upon seeing |
| उर | हृदय में | in the heart |
| अनुराग | प्रेम | love |
| रहत | रुकता; वश में रहता | remained restrained |
| नहिं | नहीं | not |
| रोकैं | रोकने पर भी | even upon attempting restraint |
2 दैखि दसा सुर बरिसहिं फूला। भइ मृदु महि मगु मंगल मूला।।
English explanation
Seeing Bharata’s condition, the gods shower flowers. The earth became soft, and the path became a source of auspiciousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दैखि | देखकर | having seen |
| दसा | दशा; अवस्था | condition |
| सुर | देवता | the gods |
| बरिसहिं | बरसाते हैं | shower |
| फूला | फूल | flowers |
| भइ | हो गई | became |
| मृदु | कोमल | soft |
| महि | धरती | the earth |
| मगु | मार्ग | the path |
| मंगल | मंगल; शुभता का | of auspiciousness |
| मूला | मूल; आधार | source; foundation |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.216
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 523
- सहायक विषय
- भरद्वाजद्वारा भरतका सत्कार
- मुद्रित पृष्ठ
- 523, 523
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।