अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम प्रताप नाथ बल तोरे। करहिं कटकु बिनु भट बिनु घोरे।।
मूल पाठ
राम प्रताप नाथ बल तोरे। करहिं कटकु बिनु भट बिनु घोरे।।
जीवत पाउ न पाछें धरहीं। रुंड मुंडमय मेदिनि करहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.192 · पुस्तक पृ. 502, 503
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! श्रीरामचन्द्रजीके प्रतापसे और आपके बलसे हमलोग भरतकी सेनाको बिना वीर और बिना घोड़ेकी कर देंगे (एक-एक वीर और एक-एक घोड़ेको मार डालेंगे)। जीते-जी पीछे पाँव न रखेंगे। पृथ्वीको रुण्ड-मुण्डमयी कर देंगे (सिरों और धड़ोंसे छा देंगे)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 502 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम प्रताप नाथ बल तोरे। करहिं कटकु बिनु भट बिनु घोरे।।
English explanation
AI draft: By Rama’s might and your strength, lord, we will leave the army without warriors or horses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम के | of Rama |
| प्रताप | प्रताप से | by the might |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| बल | बल से | by the strength |
| तोरे | आपके | your |
| करहिं | हम कर देंगे | we will make |
| कटकु | सेना को | the army |
| बिनु | बिना | without |
| भट | योद्धाओं के | warriors |
| बिनु | बिना | without |
| घोरे | घोड़ों के | horses |
2 जीवत पाउ न पाछें धरहीं। रुंड मुंडमय मेदिनि करहीं।।
English explanation
While alive, we will not take a step backward; we will cover the earth with severed trunks and heads.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीवत | जीते-जी | while alive |
| पाउ | पाँव | a foot |
| न | नहीं | not |
| पाछें | पीछे | backward |
| धरहीं | रखेंगे | will place |
| रुंड | सिर-विहीन धड़ों से | with headless trunks |
| मुंडमय | सिरों से भरी | filled with heads |
| मेदिनि | धरती को | the earth |
| करहीं | कर देंगे | will make |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.192
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 502
- सहायक विषय
- निषादकी शङ्का और सावधानी
- मुद्रित पृष्ठ
- 502, 503
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।