अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम पुनीत बिषय रस रूखे। लोलुप भूमि भोग के भूखे।।
मूल पाठ
राम पुनीत बिषय रस रूखे। लोलुप भूमि भोग के भूखे।।
कहँ लगि कहौं हृदय कठिनाई। निदरि कुलिसु जेहिं लही बड़ाई।।
स्रोत अभिलेख 2.179 · पुस्तक पृ. 491, 492
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[इसका यही कारण है कि ये प्राण] श्रीरामरूपी पवित्र विषय-रसमें आसक्त नहीं हैं। ये लालची भूमि और भोगोंके ही भूखे हैं। मैं अपने हृदयकी कठोरता कहाँतक कहूँ? जिसने वज्रका भी तिरस्कार करके बड़ाई पायी है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 492 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम पुनीत बिषय रस रूखे। लोलुप भूमि भोग के भूखे।।
English explanation
Rama is pure and indifferent to sensual pleasures; I am greedy, hungry for dominion and enjoyment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम | Rama |
| पुनीत | पवित्र | pure |
| बिषय | इंद्रिय-विषयों के | of sense objects |
| रस | सुख; आस्वाद | pleasure; enjoyment |
| रूखे | उदासीन; अरुचि रखने वाले | indifferent; without appetite |
| लोलुप | लोभी | greedy |
| भूमि | भूमि; राज्य | land; dominion |
| भोग | भोग-सुख | worldly enjoyments |
| के | के | for |
| भूखे | भूखा; लालायित | hungry; craving |
2 कहँ लगि कहौं हृदय कठिनाई। निदरि कुलिसु जेहिं लही बड़ाई।।
English explanation
How far can I describe my heart’s hardness? It has surpassed even the thunderbolt, earning distinction in hardness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहँ | कहाँ | how far |
| लगि | तक | up to |
| कहौं | मैं कहूँ | can I describe |
| हृदय | हृदय की | of my heart |
| कठिनाई | कठोरता | hardness |
| निदरि | तुच्छ ठहराकर; मात देकर | disdaining; surpassing |
| कुलिसु | वज्र | the thunderbolt |
| जेहिं | जिसने | which |
| लही | पाई | has gained |
| बड़ाई | श्रेष्ठता; बढ़कर होने की प्रतिष्ठा | superiority; distinction |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.179
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 492
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 491, 492
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।