अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम देखि सुनि चरित तुम्हारे। जड़ मोहहिं बुध होहिं सुखारे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे राम! आपके चरित्रोंको देख और सुनकर मूर्ख लोग तो मोहको प्राप्त होते हैं और ज्ञानीजन सुखी होते हैं। आप जो कुछ कहते, करते हैं, वह सब सत्य (उचित) ही है; क्योंकि जैसा स्वाँग भरे वैसा ही नाचना भी तो चाहिये (इस समय आप मनुष्यरूपमें हैं, अत: मनुष्योचित व्यवहार करना ठीक ही है)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 450 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम देखि सुनि चरित तुम्हारे। जड़ मोहहिं बुध होहिं सुखारे।।
तुम्ह जो कहहु करहु सबु साँचा। जस काछिअ तस चाहिअ नाचा।।
स्रोत अभिलेख 2.127 · पुस्तक पृ. 449, 450
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम देखि सुनि चरित तुम्हारे। जड़ मोहहिं बुध होहिं सुखारे।।
English explanation
O Rama, seeing and hearing your deeds, the undiscerning become bewildered, while the wise find joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | हे राम | O Rama |
| देखि | देखकर | having seen |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| चरित | आचरण और कार्य | conduct and deeds |
| तुम्हारे | आपके | your |
| जड़ | अज्ञानी या अविवेकी लोग | the ignorant or undiscerning |
| मोहहिं | मोह में पड़ते हैं | become bewildered |
| बुध | विवेकी लोग | the wise |
| होहिं | होते हैं | become |
| सुखारे | सुखी | joyful |
2 तुम्ह जो कहहु करहु सबु साँचा। जस काछिअ तस चाहिअ नाचा।।
English explanation
Whatever you say and do is true; one should perform according to the costume one has assumed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप | you |
| जो | जो कुछ | whatever |
| कहहु | कहते हैं | say |
| करहु | करते हैं | do |
| सबु | सब | all |
| साँचा | सत्य | true |
| जस | जैसा | in whatever manner |
| काछिअ | वेश धारण किया जाए | one dresses for a role |
| तस | वैसा | accordingly |
| चाहिअ | चाहिए | should |
| नाचा | नाचना या अभिनय करना | dance or perform |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.127
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 450
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 449, 450
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।