अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चिदानंदमय देह तुम्हारी। बिगत बिकार जान अधिकारी।।
मूल पाठ
चिदानंदमय देह तुम्हारी। बिगत बिकार जान अधिकारी।।
नर तनु धरेहु संत सुर काजा। कहहु करहु जस प्राकृत राजा।।
स्रोत अभिलेख 2.127 · पुस्तक पृ. 449, 450
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपकी देह चिदानन्दमय है (यह प्रकृतिजन्य पञ्चमहाभूतोंकी बनी हुई कर्मबन्धनयुक्त, त्रिदेह- विशिष्ट मायिक नहीं है) और [उत्पत्ति-नाश, वृद्धि-क्षय आदि] सब विकारोंसे रहित है; इस रहस्यको अधिकारी पुरुष ही जानते हैं। आपने देवता और संतोंके कार्यके लिये [दिव्य] नर-शरीर धारण किया है और प्राकृत (प्रकृतिके तत्त्वोंसे निॢमत देहवाले, साधारण) राजाओंकी तरहसे कहते और करते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 449 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चिदानंदमय देह तुम्हारी। बिगत बिकार जान अधिकारी।।
English explanation
Your body is full of consciousness and bliss, free from alteration or defect; one qualified to understand knows this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चिदानंदमय | चेतना और आनंद से पूर्ण | full of consciousness and bliss |
| देह | देह या शरीर | body |
| तुम्हारी | आपकी | your |
| बिगत | रहित | free from |
| बिकार | परिवर्तन और दोष | alterations and defects |
| जान | जानता है | knows |
| अधिकारी | समझने की योग्यता रखनेवाला | one qualified to understand |
2 नर तनु धरेहु संत सुर काजा। कहहु करहु जस प्राकृत राजा।।
English explanation
You have assumed a human body for the purposes of saints and gods; you speak and act like an ordinary king.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नर | मनुष्य का | human |
| तनु | शरीर | body |
| धरेहु | आपने धारण किया है | you have assumed |
| संत | संतों के | of saints |
| सुर | देवताओं के | of gods |
| काजा | कार्य के लिए | for their purposes |
| कहहु | आप कहते हैं | you speak |
| करहु | आप करते हैं | you act |
| जस | जैसे | as does |
| प्राकृत | साधारण लौकिक | ordinary, worldly |
| राजा | राजा | a king |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.127
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 449
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 449, 450
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।