अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोइ जानइ जेहि देहु जनाई। जानत तुम्हहि तुम्हइ होइ जाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवही आपको जानता है जिसे आप जना देते हैं और जानते ही वह आपका ही स्वरूप बन जाता है। हे रघुनन्दन! हे भक्तोंके हृदयके शीतल करनेवाले चन्दन! आपकी ही कृपासे भक्त आपको जान पाते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 449 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सोइ जानइ जेहि देहु जनाई। जानत तुम्हहि तुम्हइ होइ जाई।।
तुम्हरिहि कृपाँ तुम्हहि रघुनंदन। जानहिं भगत भगत उर चंदन।।
स्रोत अभिलेख 2.127 · पुस्तक पृ. 449, 450
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सोइ जानइ जेहि देहु जनाई। जानत तुम्हहि तुम्हइ होइ जाई।।
English explanation
Only the one to whom you reveal yourself knows you; upon knowing you, that person becomes you yourself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | only that person |
| जानइ | जानता है | knows |
| जेहि | जिसे | to whom |
| देहु | आप देते हैं | you grant |
| जनाई | जानकारी या परिचय कराकर | by making yourself known |
| जानत | जानते ही | upon knowing |
| तुम्हहि | आपको | you |
| तुम्हइ | आप ही | you yourself |
| होइ | हो | becomes |
| जाई | जाता है | comes to be |
2 तुम्हरिहि कृपाँ तुम्हहि रघुनंदन। जानहिं भगत भगत उर चंदन।।
English explanation
O Rama, joy of Raghu’s lineage and sandalwood that soothes devotees’ hearts, devotees know you only through your grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्हरिहि | आपकी ही | your alone |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| तुम्हहि | आपको | you |
| रघुनंदन | हे रघुवंश को आनंद देनेवाले राम | O Rama, joy of Raghu’s lineage |
| जानहिं | जानते हैं | know |
| भगत | भक्त | devotees |
| भगत | भक्तों के | of devotees |
| उर | हृदय | hearts |
| चंदन | शीतलता देनेवाले चंदन | soothing sandalwood |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.127
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 449
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 449, 450
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।