अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जगु पेखन तुम्ह देखनिहारे। बिधि हरि संभु नचावनिहारे।।
मूल पाठ
जगु पेखन तुम्ह देखनिहारे। बिधि हरि संभु नचावनिहारे।।
तेउ न जानहिं मरमु तुम्हारा। औरु तुम्हहि को जाननिहारा।।
स्रोत अभिलेख 2.127 · पुस्तक पृ. 449, 450
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे राम! जगत् दृश्य है, आप उसके देखनेवाले हैं। आप ब्रह्मा, विष्णु और शङ्करको भी नचानेवाले हैं। जब वे भी आपके मर्मको नहीं जानते, तब और कौन आपको जाननेवाला है?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 449 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जगु पेखन तुम्ह देखनिहारे। बिधि हरि संभु नचावनिहारे।।
English explanation
The world is a dramatic spectacle; you are its observer and the one who makes even Brahma, Vishnu, and Shiva dance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जगु | जगत | the world |
| पेखन | नाट्य या तमाशा | a dramatic spectacle |
| तुम्ह | आप, राम | you, Rama |
| देखनिहारे | देखनेवाले | the observer |
| बिधि | ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| हरि | विष्णु | Vishnu |
| संभु | शिव | Shiva |
| नचावनिहारे | नचानेवाले | the one who makes them dance |
2 तेउ न जानहिं मरमु तुम्हारा। औरु तुम्हहि को जाननिहारा।।
English explanation
Even they do not know your inner mystery; who else, then, can know you?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेउ | वे भी | even they |
| न | नहीं | not |
| जानहिं | जानते हैं | know |
| मरमु | भीतरी रहस्य या वास्तविक स्वरूप | inner mystery or true nature |
| तुम्हारा | आपका | your |
| औरु | और कोई | anyone else |
| तुम्हहि | आपको | you |
| को | कौन | who |
| जाननिहारा | जाननेवाला | one who can know |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.127
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 449
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 449, 450
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।