अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम कुसल कहु सखा सनेही। कहँ रघुनाथु लखनु बैदेही।।
मूल पाठ
राम कुसल कहु सखा सनेही। कहँ रघुनाथु लखनु बैदेही।।
आने फेरि कि बनहि सिधाए। सुनत सचिव लोचन जल छाए।।
स्रोत अभिलेख 2.149 · पुस्तक पृ. 467, 468
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे मेरे प्रेमी सखा! श्रीरामकी कुशल कहो। बताओ, श्रीराम,लक्ष्मण और जानकी कहाँ हैं? उन्हें लौटा लाये हो कि वे वनको चले गये? यह सुनते ही मन्त्रीके नेत्रोंमें जल भर आया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 467 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम कुसल कहु सखा सनेही। कहँ रघुनाथु लखनु बैदेही।।
English explanation
Dear, affectionate friend, tell me of Rama’s welfare. Where are Rama, Lakshmana, and Sita?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम की | Rama’s |
| कुसल | कुशल-क्षेम | well-being |
| कहु | बताओ | tell me |
| सखा | हे मित्र | O friend |
| सनेही | स्नेह करने वाले | affectionate |
| कहँ | कहाँ हैं | where are |
| रघुनाथु | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| बैदेही | विदेह की राजकुमारी सीता | Sita, princess of Videha |
2 आने फेरि कि बनहि सिधाए। सुनत सचिव लोचन जल छाए।।
English explanation
Have you brought them back, or have they gone into the forest? Hearing this, the minister’s eyes filled with tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आने | ले आए | brought them |
| फेरि | वापस | back |
| कि | या | or |
| बनहि | वन को | to the forest |
| सिधाए | चले गए | departed |
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| सचिव | मंत्री सुमंत्र के | the minister Sumantra’s |
| लोचन | नेत्रों में | eyes |
| जल | आँसू | tears |
| छाए | छा गए; भर आए | welled up |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.149
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 467
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 467, 468
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