अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोक बिकल पुनि पूँछ नरेसू। कहु सिय राम लखन संदेसू।।
मूल पाठ
सोक बिकल पुनि पूँछ नरेसू। कहु सिय राम लखन संदेसू।।
राम रूप गुन सील सुभाऊ। सुमिरि सुमिरि उर सोचत राऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.149 · पुस्तक पृ. 467, 468
भावार्थ
मूल पाठ के बादशोकसे व्याकुल होकर राजा फिर पूछने लगे—सीता, राम और लक्ष्मणका सँदेसा तो कहो। श्रीरामचन्द्रजीके रूप, गुण, शील और स्वभावको याद कर-करके राजा हृदयमें सोच करते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 467 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सोक बिकल पुनि पूँछ नरेसू। कहु सिय राम लखन संदेसू।।
English explanation
Distraught with grief, the king asks again, ‘Tell me the message from Sita, Rama, and Lakshmana.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोक | शोक से | with grief |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| पुनि | फिर | again |
| पूँछ | पूछते हैं | asks |
| नरेसू | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| कहु | बताओ | tell me |
| सिय | सीता का | Sita’s |
| राम | राम का | Rama’s |
| लखन | लक्ष्मण का | Lakshmana’s |
| संदेसू | संदेश | message |
2 राम रूप गुन सील सुभाऊ। सुमिरि सुमिरि उर सोचत राऊ।।
English explanation
Repeatedly recalling Rama’s appearance, virtues, noble conduct, and disposition, the king grieves in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | Rama’s |
| रूप | रूप; सुंदर स्वरूप | appearance; beauty |
| गुन | गुण | virtues |
| सील | सदाचार; शिष्ट आचरण | noble conduct |
| सुभाऊ | स्वभाव | disposition |
| सुमिरि | याद करके | recalling |
| सुमिरि | बार-बार याद करके | recalling again |
| उर | हृदय में | in his heart |
| सोचत | शोक करते हैं | grieves |
| राऊ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.149
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 467
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 467, 468
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