अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भूप सुमंत्रु लीन्ह उर लाई। बूड़त कछु अधार जनु पाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजाने सुमन्त्रको हृदयसे लगा लिया। मानो डूबते हुए आदमीको कुछ सहारा मिल गया हो। मन्त्रीको स्नेहके साथ पास बैठाकर नेत्रोंमें जल भरकर राजा पूछने लगे—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 467 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भूप सुमंत्रु लीन्ह उर लाई। बूड़त कछु अधार जनु पाई।।
सहित सनेह निकट बैठारी। पूँछत राउ नयन भरि बारी।।
स्रोत अभिलेख 2.149 · पुस्तक पृ. 467, 468
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भूप सुमंत्रु लीन्ह उर लाई। बूड़त कछु अधार जनु पाई।।
English explanation
King Dasharatha clasped Sumantra to his breast, as though a drowning man had found some support.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूप | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| सुमंत्रु | मंत्री सुमंत्र को | Sumantra, the minister |
| लीन्ह | ले लिया | took |
| उर | हृदय से | to his breast |
| लाई | लगाकर | clasping |
| बूड़त | डूबते हुए | while drowning |
| कछु | कुछ | some |
| अधार | सहारा | support |
| जनु | मानो | as though |
| पाई | पा लिया हो | had found |
2 सहित सनेह निकट बैठारी। पूँछत राउ नयन भरि बारी।।
English explanation
Seating Sumantra near him affectionately, the king began asking with tears filling his eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहित | सहित; के साथ | with |
| सनेह | स्नेह | affection |
| निकट | पास | nearby |
| बैठारी | बैठाकर | having seated him |
| पूँछत | पूछते हैं | asks |
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| नयन | आँखों में | in his eyes |
| भरि | भरकर | filling |
| बारी | जल; आँसू | water; tears |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.149
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 467
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 467, 468
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