अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राँय राजपदु तुम्ह कहुँ दीन्हा। पिता बचनु फुर चाहिअ कीन्हा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजाने राजपद तुमको दिया है। पिताका वचन तुम्हें सत्य करना चाहिये, जिन्होंने वचनके लिये ही श्रीरामचन्द्रजीको त्याग दिया और रामविरहकी अग्निमें अपने शरीरकी आहुति दे दी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 487 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राँय राजपदु तुम्ह कहुँ दीन्हा। पिता बचनु फुर चाहिअ कीन्हा।।
तजे रामु जेहिं बचनहि लागी। तनु परिहरेउ राम बिरहागी।।
स्रोत अभिलेख 2.174 · पुस्तक पृ. 487, 488
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राँय राजपदु तुम्ह कहुँ दीन्हा। पिता बचनु फुर चाहिअ कीन्हा।।
English explanation
The king has given you the throne; your father’s word should be fulfilled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राँय | राजा ने | the king |
| राजपदु | राजपद; सिंहासन | kingship; the throne |
| तुम्ह | तुम्हें, भरत को | you, Bharata |
| कहुँ | को | to |
| दीन्हा | दिया | gave |
| पिता | पिता का | the father’s |
| बचनु | वचन | word; promise |
| फुर | सत्य; पूरा | true; fulfilled |
| चाहिअ | चाहिए | should be |
| कीन्हा | किया जाना | made; carried out |
2 तजे रामु जेहिं बचनहि लागी। तनु परिहरेउ राम बिरहागी।।
English explanation
For the sake of that promise, the king parted with Rama, and in the fire of separation from Rama he gave up his body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तजे | त्यागा; विदा किया | parted with; sent away |
| रामु | राम को | Rama |
| जेहिं | जिस | which; that |
| बचनहि | वचन के ही | that very promise |
| लागी | लिए | for the sake of |
| तनु | शरीर | body |
| परिहरेउ | छोड़ दिया | gave up |
| राम | राम के | from Rama |
| बिरहागी | वियोग की आग में | in the fire of separation |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.174
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 487
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 487, 488
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