अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नृपहि बचन प्रिय नहिं प्रिय प्राना। करहु तात पितु बचन प्रवाना।।
मूल पाठ
नृपहि बचन प्रिय नहिं प्रिय प्राना। करहु तात पितु बचन प्रवाना।।
करहु सीस धरि भूप रजाई। हइ तुम्ह कहँ सब भाँति भलाई।।
स्रोत अभिलेख 2.174 · पुस्तक पृ. 487, 488
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाको वचन प्रिय थे, प्राण प्रिय नहीं थे। इसलिये हे तात! पिताके वचनोंको प्रमाण (सत्य) करो! राजाकी आज्ञा सिर चढ़ाकर पालन करो, इसमें तुम्हारी सब तरह भलाई है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 488 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नृपहि बचन प्रिय नहिं प्रिय प्राना। करहु तात पितु बचन प्रवाना।।
English explanation
The king cherished his word, not his life; dear son, honor your father’s word and fulfill it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृपहि | राजा को | to the king |
| बचन | वचन | his word; promise |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| नहिं | नहीं | not |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| प्राना | प्राण; जीवन | life |
| करहु | करो | make; uphold |
| तात | हे प्रिय पुत्र | dear son |
| पितु | पिता का | your father’s |
| बचन | वचन | word; promise |
| प्रवाना | प्रमाणित; मान्य और पूरा | honored and fulfilled |
2 करहु सीस धरि भूप रजाई। हइ तुम्ह कहँ सब भाँति भलाई।।
English explanation
Respectfully accept and carry out the king’s command; it will bring you good in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहु | पालन करो | carry out |
| सीस | सिर पर | upon the head |
| धरि | रखकर; आदर से स्वीकार कर | placing; respectfully accepting |
| भूप | राजा की | the king’s |
| रजाई | आज्ञा | command |
| हइ | होगी | will be |
| तुम्ह | तुम्हारे | you; your |
| कहँ | लिए | for |
| सब | सब | every |
| भाँति | प्रकार से | way |
| भलाई | भलाई; कल्याण | good; welfare |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.174
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 488
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 487, 488
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