अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परसुराम पितु अग्या राखी। मारी मातु लोक सब साखी।।
मूल पाठ
परसुराम पितु अग्या राखी। मारी मातु लोक सब साखी।।
तनय जजातिहि जौबनु दयऊ। पितु अग्याँ अघ अजसु न भयऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.174 · पुस्तक पृ. 487, 488
भावार्थ
मूल पाठ के बादपरशुरामजीने पिताकी आज्ञा रखी और माताको मार डाला; सब लोक इस बातके साक्षी हैं। राजा ययातिके पुत्रने पिताको अपनी जवानी दे दी। पिताकी आज्ञा पालन करनेसे उन्हें पाप और अपयश नहीं हुआ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 488 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 परसुराम पितु अग्या राखी। मारी मातु लोक सब साखी।।
English explanation
Parashurama obeyed his father’s command and killed his mother; the whole world bears witness to this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परसुराम | परशुराम ने, जमदग्नि के पुत्र | Parashurama, son of Jamadagni |
| पितु | पिता की | his father’s |
| अग्या | आज्ञा | command |
| राखी | पालन किया | obeyed |
| मारी | मार डाला | killed |
| मातु | माता को | his mother |
| लोक | संसार | the world |
| सब | सारा | all; entire |
| साखी | साक्षी है | is witness |
2 तनय जजातिहि जौबनु दयऊ। पितु अग्याँ अघ अजसु न भयऊ।।
English explanation
The son gave his youth to Yayati; obeying the father’s command brought neither sin nor disgrace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तनय | पुत्र ने, पुरु ने | the son, Puru |
| जजातिहि | राजा ययाति को | to King Yayati |
| जौबनु | यौवन | youth |
| दयऊ | दिया | gave |
| पितु | पिता की | the father’s |
| अग्याँ | आज्ञा मानने से | through obeying the command |
| अघ | पाप | sin |
| अजसु | अपयश | disgrace; ill repute |
| न | नहीं | not; neither |
| भयऊ | हुआ | arose; resulted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.174
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 488
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 487, 488
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।