अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रहहु तात असि नीति बिचारी। सुनत लखनु भए ब्याकुल भारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे तात! ऐसी नीति विचारकर तुम घर रह जाओ। यह सुनते ही लक्ष्मणजी बहुत ही व्याकुल हो गये। इन शीतल वचनोंसे वे कैसे सूख गये, जैसे पालेके स्पर्शसे कमल सूख जाता है!॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 402 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रहहु तात असि नीति बिचारी। सुनत लखनु भए ब्याकुल भारी।।
सिअरें बचन सूखि गए कैंसें। परसत तुहिन तामरसु जैसें।।
स्रोत अभिलेख 2.71 · पुस्तक पृ. 402, 402
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रहहु तात असि नीति बिचारी। सुनत लखनु भए ब्याकुल भारी।।
English explanation
Dear brother, consider this principle of right conduct and stay here. Hearing this, Lakshmana became deeply distressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहहु | रहो | stay |
| तात | प्रिय भाई | dear brother |
| असि | ऐसी | such |
| नीति | नीति; उचित आचरण का सिद्धांत | principle of right conduct |
| बिचारी | विचार करके | having considered |
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| भए | हो गए | became |
| ब्याकुल | व्याकुल | distressed |
| भारी | अत्यंत | deeply |
2 सिअरें बचन सूखि गए कैंसें। परसत तुहिन तामरसु जैसें।।
English explanation
How Lakshmana withered at those cool words—like a lotus touched by frost!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिअरें | शीतल | cool; gentle |
| बचन | वचनों से | at the words |
| सूखि | मुरझा | withered |
| गए | गए | became |
| कैंसें | कैसे | how |
| परसत | स्पर्श होने पर | when touched by |
| तुहिन | पाला | frost |
| तामरसु | कमल | a lotus |
| जैसें | जैसे | just as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.71
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 402
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 402, 402
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।