अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रहहु करहु सब कर परितोषू। नतरु तात होइहि बड़ दोषू।।
मूल पाठ
रहहु करहु सब कर परितोषू। नतरु तात होइहि बड़ दोषू।।
जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी। सो नृपु अवसि नरक अधिकारी।।
स्रोत अभिलेख 2.71 · पुस्तक पृ. 402, 402
भावार्थ
मूल पाठ के बादअत: तुम यहीं रहो और सबका सन्तोष करते रहो। नहीं तो हे तात! बड़ा दोष होगा। जिसके राज्यमें प्यारी प्रजा दु:खी रहती है, वह राजा अवश्य ही नरकका अधिकारी होता है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 402 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रहहु करहु सब कर परितोषू। नतरु तात होइहि बड़ दोषू।।
English explanation
Stay here and bring contentment to everyone; otherwise, dear brother, a grave wrong will result.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहहु | रहो | stay |
| करहु | करो | bring about |
| सब | सब | everyone |
| कर | का | of |
| परितोषू | संतोष | contentment |
| नतरु | नहीं तो | otherwise |
| तात | प्रिय भाई | dear brother |
| होइहि | होगा | will arise |
| बड़ | बड़ा | grave |
| दोषू | दोष | wrong; blame |
2 जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी। सो नृपु अवसि नरक अधिकारी।।
English explanation
A king under whose rule the dear subjects suffer is certainly deserving of hell.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिसके | whose |
| राज | राज्य में | under the rule |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| प्रजा | प्रजा | subjects |
| दुखारी | दुःखी है | are suffering |
| सो | वह | that |
| नृपु | राजा | king |
| अवसि | निश्चय ही | certainly |
| नरक | नरक का | of hell |
| अधिकारी | पात्र | deserving |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.71
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 402
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 402, 402
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।