अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मैं बन जाउँ तुम्हहि लेइ साथा। होइ सबहि बिधि अवध अनाथा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइस अवस्थामें मैं तुमको साथ लेकर वन जाऊँ तो अयोध्या सभी प्रकारसे अनाथ हो जायगी। गुरु, पिता, माता, प्रजा और परिवार सभीपर दु:खका दु:सह भार आ पड़ेगा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 402 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मैं बन जाउँ तुम्हहि लेइ साथा। होइ सबहि बिधि अवध अनाथा।।
गुरु पितु मातु प्रजा परिवारू। सब कहुँ परइ दुसह दुख भारू।।
स्रोत अभिलेख 2.71 · पुस्तक पृ. 402, 402
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मैं बन जाउँ तुम्हहि लेइ साथा। होइ सबहि बिधि अवध अनाथा।।
English explanation
If I go to the forest taking you with me, Ayodhya will be left without support in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं | I |
| बन | वन में | to the forest |
| जाउँ | जाऊँ | should go |
| तुम्हहि | तुम्हें | you |
| लेइ | लेकर | taking |
| साथा | साथ | along |
| होइ | हो जाएगी | will become |
| सबहि | सभी | every |
| बिधि | प्रकार से | in every way |
| अवध | अयोध्या | Ayodhya |
| अनाथा | बिना सहारे की | without support |
2 गुरु पितु मातु प्रजा परिवारू। सब कहुँ परइ दुसह दुख भारू।।
English explanation
An unbearable, heavy burden of sorrow will fall upon the preceptor, father, mother, subjects, and family alike.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुरु | गुरु | the preceptor |
| पितु | पिता | father |
| मातु | माता | mother |
| प्रजा | राज्य की प्रजा | the subjects |
| परिवारू | परिवार | the family |
| सब | सब | all |
| कहुँ | पर | upon |
| परइ | पड़ेगा | will fall |
| दुसह | असहनीय | unbearable |
| दुख | दुःख का | of sorrow |
| भारू | भारी बोझ | a heavy burden |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.71
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 402
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 402, 402
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।