अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस जियँ जानि सुनहु सिख भाई। करहु मातु पितु पद सेवकाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे भाई! हृदयमें ऐसा जानकर मेरी सीख सुनो और माता-पिताके चरणोंकी सेवा करो। भरत और शत्रुघ्न घरपर नहीं हैं, महाराज वृद्ध हैं और उनके मनमें मेरा दु:ख है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 402 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस जियँ जानि सुनहु सिख भाई। करहु मातु पितु पद सेवकाई।।
भवन भरतु रिपुसूदन नाहीं। राउ बृद्ध मम दुखु मन माहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.71 · पुस्तक पृ. 402, 402
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अस जियँ जानि सुनहु सिख भाई। करहु मातु पितु पद सेवकाई।।
English explanation
AI draft: Knowing this in your heart, brother, listen to my advice: serve your mother and father at their feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| जियँ | हृदय में | in your heart |
| जानि | जानकर | having understood |
| सुनहु | सुनो | listen |
| सिख | सीख; उपदेश | advice |
| भाई | हे भाई | O brother |
| करहु | करो | perform |
| मातु | माता के | of your mother |
| पितु | पिता के | of your father |
| पद | चरणों की | at the feet |
| सेवकाई | सेवा | service |
2 भवन भरतु रिपुसूदन नाहीं। राउ बृद्ध मम दुखु मन माहीं।।
English explanation
Bharata and Shatrughna are not at home. The king is aged, and his heart holds sorrow on my account.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भवन | घर में | at home |
| भरतु | भरत | Bharata, Rama’s brother |
| रिपुसूदन | शत्रुघ्न; शत्रुओं का संहार करनेवाले | Shatrughna, destroyer of enemies |
| नाहीं | नहीं हैं | are not present |
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| बृद्ध | वृद्ध हैं | is aged |
| मम | मेरे कारण | on my account |
| दुखु | दुःख | sorrow |
| मन | मन | the heart |
| माहीं | में | within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.71
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 402
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 402, 402
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।