अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रथु पहिचानि बिकल लखि घोरे। गरहिं गात जिमि आतप ओरे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दरथको पहचानकर और घोड़ोंको व्याकुल देखकर उनके शरीर ऐसे गले जा रहे हैं (क्षीण हो रहे हैं) जैसे घाममें ओले! नगरके स्त्री-पुरुष कैसे व्याकुल हैं जैसे जलके घटनेपर मछलियाँ [व्याकुल होती हैं]॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 466 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रथु पहिचानि बिकल लखि घोरे। गरहिं गात जिमि आतप ओरे।।
नगर नारि नर ब्याकुल कैंसें। निघटत नीर मीनगन जैंसें।।
स्रोत अभिलेख 2.147 · पुस्तक पृ. 465, 466
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रथु पहिचानि बिकल लखि घोरे। गरहिं गात जिमि आतप ओरे।।
English explanation
Recognizing the chariot and seeing the distressed horses, the people’s bodies seemed to melt like hailstones in the sun.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रथु | रथ को | the chariot |
| पहिचानि | पहचानकर | having recognized |
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| लखि | देखकर | seeing |
| घोरे | घोड़ों को | the horses |
| गरहिं | गलने लगे | melted away |
| गात | शरीर | bodies |
| जिमि | जैसे | like |
| आतप | धूप में | in the sun’s heat |
| ओरे | ओले | hailstones |
2 नगर नारि नर ब्याकुल कैंसें। निघटत नीर मीनगन जैंसें।।
English explanation
How distressed the city’s women and men were—like shoals of fish as the water dwindles!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नगर | नगर की | of the city |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| नर | पुरुष | men |
| ब्याकुल | व्याकुल | distressed |
| कैंसें | कैसे; किस तरह | how; in what manner |
| निघटत | घटते हुए | dwindling |
| नीर | पानी के | water |
| मीनगन | मछलियों के समूह | shoals of fish |
| जैंसें | जैसे | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.147
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 466
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 465, 466
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।