अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रघुपति भगति सुमंगल मूला। नभ सराहि सुर बरिसहिं फूला।।
मूल पाठ
रघुपति भगति सुमंगल मूला। नभ सराहि सुर बरिसहिं फूला।।
एहि सम निपट नीच कोउ नाहीं। बड़ बसिष्ठ सम को जग माहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.243 · पुस्तक पृ. 546, 546
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरघुनाथजीकी भक्ति सुन्दर मङ्गलोंका मूल है, इस प्रकार कहकर सराहना करते हुए देवता आकाशसे फूल बरसाने लगे। वे कहने लगे—जगत्में इसके समान सर्वथा नीच कोई नहीं और वसिष्ठजीके समान बड़ा कौन हैं?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 546 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रघुपति भगति सुमंगल मूला। नभ सराहि सुर बरिसहिं फूला।।
English explanation
Devotion to Rama is the root of all auspicious blessings; praising it, the gods shower flowers from the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम की | to Rama, lord of the Raghu lineage |
| भगति | भक्ति | devotion |
| सुमंगल | शुभ मंगलों की | of auspicious blessings |
| मूला | जड़; आधार | root; foundation |
| नभ | आकाश से | from the sky |
| सराहि | सराहना करके | praising |
| सुर | देवता | the gods |
| बरिसहिं | बरसाते हैं | shower |
| फूला | फूल | flowers |
2 एहि सम निपट नीच कोउ नाहीं। बड़ बसिष्ठ सम को जग माहीं।।
English explanation
No one is regarded as so low in social rank as this Nishada chief; and who in the world is as great as Vasishtha?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस निषादराज के | this Nishada chief |
| सम | समान | like |
| निपट | अत्यंत | utterly |
| नीच | सामाजिक श्रेणी में नीचा माना गया | regarded as low in social rank |
| कोउ | कोई | anyone |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
| बड़ | महान | great |
| बसिष्ठ | ऋषि वसिष्ठ के | the sage Vasishtha |
| सम | समान | equal to |
| को | कौन | who |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.243
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 546
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 546, 546
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।