अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
यह न अधिक रघुबीर बड़ाई। प्रनत कुटुंब पाल रघुराई।।
मूल पाठ
यह न अधिक रघुबीर बड़ाई। प्रनत कुटुंब पाल रघुराई।।
तुम्ह तौ भरत मोर मत एहू। धरें देह जनु राम सनेहू।।
स्रोत अभिलेख 2.208 · पुस्तक पृ. 516, 516
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह श्रीरघुनाथजीकी बहुत बड़ाई नहीं है। क्योंकि श्रीरघुनाथजी तो शरणागतके कुटुम्बभरको पालनेवाले हैं। हे भरत! मेरा यह मत है कि तुम तो मानो शरीरधारी श्रीरामजीके प्रेम ही हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 516 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 यह न अधिक रघुबीर बड़ाई। प्रनत कुटुंब पाल रघुराई।।
English explanation
This is no extraordinary praise of Rama: the lord of Raghu’s line sustains the family of those who seek refuge in him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह बात | this |
| न | नहीं | not |
| अधिक | असाधारण | extraordinary |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम की | of Rama, hero of Raghu’s line |
| बड़ाई | बड़ाई | praise |
| प्रनत | शरणागतों के | of those seeking refuge |
| कुटुंब | परिवार के | of the family |
| पाल | पालक | sustainer |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
2 तुम्ह तौ भरत मोर मत एहू। धरें देह जनु राम सनेहू।।
English explanation
Bharata, my view is that you are, as it were, love for Rama embodied.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम | you |
| तौ | तो | indeed |
| भरत | हे भरत | O Bharata |
| मोर | मेरा | my |
| मत | मत | view |
| एहू | यह है | is this |
| धरें | धारण किए हुए | having assumed |
| देह | शरीर | a body |
| जनु | मानो | as though |
| राम | राम के प्रति | for Rama |
| सनेहू | प्रेम | love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.208
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 516
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 516, 516
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