अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मोहि उपदेसु दीन्ह गुर नीका। प्रजा सचिव संमत सबही का।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दगुरुजीने मुझे सुन्दर उपदेश दिया। [फिर] प्रजा, मन्त्री आदि सभीको यही सम्मत है। माताने भी उचित समझकर ही आज्ञा दी है और मैं भी अवश्य उसको सिर चढ़ाकर वैसा ही करना चाहता हूँ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 490 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मोहि उपदेसु दीन्ह गुर नीका। प्रजा सचिव संमत सबही का।।
मातु उचित धरि आयसु दीन्हा। अवसि सीस धरि चाहउँ कीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 2.177 · पुस्तक पृ. 490, 491
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मोहि उपदेसु दीन्ह गुर नीका। प्रजा सचिव संमत सबही का।।
English explanation
The guru has given me sound counsel, approved by the people, the ministers, and everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मुझे | to me |
| उपदेसु | उपदेश | counsel |
| दीन्ह | दिया | gave |
| गुर | गुरु ने | the guru |
| नीका | अच्छा | sound; good |
| प्रजा | प्रजा | the people |
| सचिव | मंत्री | ministers |
| संमत | स्वीकृत | approved |
| सबही | सभी | everyone |
| का | का; द्वारा | of; by |
2 मातु उचित धरि आयसु दीन्हा। अवसि सीस धरि चाहउँ कीन्हा।।
English explanation
Mother too has given her command, deeming it proper; it should certainly be respectfully accepted and carried out.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | माता ने | mother |
| उचित | उचित | proper |
| धरि | मानकर | deeming |
| आयसु | आज्ञा | command |
| दीन्हा | दी | gave |
| अवसि | अवश्य | certainly |
| सीस | सिर पर | on the head |
| धरि | रखकर; आदर से स्वीकार करके | placing; respectfully accepting |
| चाहउँ | चाहिए | ought to |
| कीन्हा | पालन करना | carry out |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.177
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 490
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 490, 491
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।