अयोध्याकाण्ड · सोरठा 176 · सोरठा
भरतु कमल कर जोरि धीर धुरंधर धीर धरि।
भरतु कमल कर जोरि धीर धुरंधर धीर धरि।
बचन अमिअँ जनु बोरि देत उचित उत्तर सबहि॥ १७६॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.176 · पुस्तक पृ. 489, 489
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भरतु कमल कर जोरि धीर धुरंधर धीर धरि।
धैर्य में अग्रणी भरत ने अपने कमल जैसे हाथ जोड़कर और धीरज धारण करके—
English explanation
Bharata, foremost in steadfastness, joined his lotus-like hands and composed himself—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतु | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama's brother |
| कमल | कमल जैसे | lotus-like |
| कर | हाथ | hands |
| जोरि | जोड़कर | having joined |
| धीर | धैर्यवानों में | among the steadfast |
| धुरंधर | अग्रणी, श्रेष्ठ | foremost |
| धीर | धीरज | composure |
| धरि | धारण करके | having maintained |
2बचन अमिअँ जनु बोरि देत उचित उत्तर सबहि॥ १७६॥
मानो अपने वचनों को अमृत में डुबोकर, भरत सभी को उचित उत्तर देते हैं।
English explanation
As though dipping his words in nectar, Bharata gives everyone a fitting reply.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बचन | वचनों को | his words |
| अमिअँ | अमृत में | in nectar |
| जनु | मानो | as though |
| बोरि | डुबोकर | having dipped |
| देत | देते हैं | gives |
| उचित | उचित | fitting |
| उत्तर | उत्तर | reply |
| सबहि | सभी को | to everyone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- सोरठा 176
- स्रोत अभिलेख
- 2.176
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 489, 489
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