अयोध्याकाण्ड · दोहा 177 · दोहा/सोरठा
पितु सुरपुर सिय रामु बन करन कहहु मोहि राजु।
पितु सुरपुर सिय रामु बन करन कहहु मोहि राजु।
एहि तें जानहु मोर हित कै आपन बड़ काजु।।177।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.177 · पुस्तक पृ. 490, 491
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1पितु सुरपुर सिय रामु बन करन कहहु मोहि राजु।
पिता स्वर्ग में हैं, सीता और राम वन में हैं, और आप मुझे राज्य करने को कहते हैं।
English explanation
Father is in heaven, Sita and Rama are in the forest, and you tell me to rule.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पितु | पिता दशरथ | father, Dasharatha |
| सुरपुर | स्वर्ग में | in heaven |
| सिय | सीता | Sita, Rama's wife |
| रामु | राम | Rama |
| बन | वन में | in the forest |
| करन | करने को | to undertake |
| कहहु | आप कहते हैं | you tell |
| मोहि | मुझे | me |
| राजु | राज्य; शासन | rule; kingship |
2 एहि तें जानहु मोर हित कै आपन बड़ काजु।।177।।
इससे आप मेरा हित समझते हैं, या अपना कोई बड़ा प्रयोजन सिद्ध करना चाहते हैं?
English explanation
Do you see my welfare in this, or some great purpose of your own?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| तें | से | from; through |
| जानहु | आप समझते हैं | do you consider |
| मोर | मेरा | my |
| हित | हित | welfare |
| कै | या | or |
| आपन | अपना | your own |
| बड़ | बड़ा | great; major |
| काजु | प्रयोजन; कार्य | purpose; undertaking |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 177
- स्रोत अभिलेख
- 2.177
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 490, 491
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