अयोध्याकाण्ड · दोहा 178 · दोहा/सोरठा
कैकेई सुअ कुटिलमति राम बिमुख गतलाज।
कैकेई सुअ कुटिलमति राम बिमुख गतलाज।
तुम्ह चाहत सुखु मोहबस मोहि से अधम कें राज।।178।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.178 · पुस्तक पृ. 491, 491
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कैकेई सुअ कुटिलमति राम बिमुख गतलाज।
मैं कैकेयी का पुत्र, कुटिल बुद्धिवाला, राम से विमुख और लज्जाहीन हूँ।
English explanation
I am Kaikeyi’s son, crooked-minded, turned away from Rama, and bereft of shame.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कैकेई | कैकेयी का | of Kaikeyi, Bharata’s mother |
| सुअ | पुत्र | son |
| कुटिलमति | कुटिल बुद्धिवाला | crooked-minded |
| राम | राम से | from Rama |
| बिमुख | विमुख; मुँह मोड़े हुए | turned away |
| गतलाज | लज्जाहीन | bereft of shame |
2 तुम्ह चाहत सुखु मोहबस मोहि से अधम कें राज।।178।।
आप मोह के वश होकर मेरे जैसे अधम के राज्य में सुख चाहते हैं।
English explanation
Under the sway of delusion, you seek happiness in the rule of someone as lowly as me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप लोग | you |
| चाहत | चाहते हैं | seek; desire |
| सुखु | सुख | happiness |
| मोहबस | मोह के वश होकर | under the sway of delusion |
| मोहि | मुझ | me |
| से | जैसे | like |
| अधम | अधम; नीच व्यक्ति | lowly; base person |
| कें | के | of |
| राज | राज्य; शासन में | rule; reign |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 178
- स्रोत अभिलेख
- 2.178
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 491, 491
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