अयोध्याकाण्ड · दोहा 175 · दोहा/सोरठा
कीजिअ गुर आयसु अवसि कहहिं सचिव कर जोरि।
कीजिअ गुर आयसु अवसि कहहिं सचिव कर जोरि।
रघुपति आएँ उचित जस तस तब करब बहोरि।।175।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.175 · पुस्तक पृ. 488, 489
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1कीजिअ गुर आयसु अवसि कहहिं सचिव कर जोरि।
मंत्री हाथ जोड़कर कहते हैं, ‘गुरु की आज्ञा का अवश्य पालन कीजिए।’
English explanation
With folded hands, the ministers say, ‘Please certainly carry out the guru’s command.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीजिअ | पालन कीजिए | please carry out |
| गुर | गुरु की | the guru’s |
| आयसु | आज्ञा | command |
| अवसि | अवश्य | certainly |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| सचिव | मंत्री | the ministers |
| कर | हाथ | hands |
| जोरि | जोड़कर | having folded |
2 रघुपति आएँ उचित जस तस तब करब बहोरि।।175।।
रघुनाथ के लौट आने पर फिर जैसा उचित हो, वैसा करना।
English explanation
When Rama returns, then act as is appropriate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
| आएँ | आने पर | upon returning |
| उचित | उचित | appropriate |
| जस | जैसा | as |
| तस | वैसा | accordingly |
| तब | तब | then |
| करब | करना | act |
| बहोरि | फिर | thereafter |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 175
- स्रोत अभिलेख
- 2.175
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 488, 489
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।