अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुर पितु मातु स्वामि हित बानी। सुनि मन मुदित करिअ भलि जानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[क्योंकि] गुरु, पिता, माता, स्वामी और सुहृद् (मित्र) की वाणी सुनकर प्रसन्न मनसे उसे अच्छी समझकर करना (मानना) चाहिये। उचित-अनुचितका विचार करनेसे धर्म जाता है और सिरपर पापका भार चढ़ता है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 490 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गुर पितु मातु स्वामि हित बानी। सुनि मन मुदित करिअ भलि जानी।।
उचित कि अनुचित किएँ बिचारू। धरमु जाइ सिर पातक भारू।।
स्रोत अभिलेख 2.177 · पुस्तक पृ. 490, 491
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गुर पितु मातु स्वामि हित बानी। सुनि मन मुदित करिअ भलि जानी।।
English explanation
Having heard the beneficial words of one's guru, father, mother, and master, one should recognize them as good and follow them gladly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु | guru |
| पितु | पिता | father |
| मातु | माता | mother |
| स्वामि | स्वामी | master; lord |
| हित | हितकारी | beneficial |
| बानी | वाणी | words; counsel |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मन | मन से | in one's heart |
| मुदित | प्रसन्न | glad |
| करिअ | करना चाहिए; पालन करना चाहिए | one should do; follow |
| भलि | भली | good |
| जानी | जानकर | recognizing as |
2 उचित कि अनुचित किएँ बिचारू। धरमु जाइ सिर पातक भारू।।
English explanation
By deliberating whether their command is proper or improper, one loses one's duty and incurs a burden of sin.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उचित | उचित | proper |
| कि | या | or |
| अनुचित | अनुचित | improper |
| किएँ | करने पर | upon undertaking |
| बिचारू | विचार | deliberation |
| धरमु | धर्म; कर्तव्यपालन | duty; righteousness |
| जाइ | चला जाता है | is lost |
| सिर | सिर पर | upon one's head |
| पातक | पाप का | of sin |
| भारू | भार | burden |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.177
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 490
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 490, 491
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।