अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि महिसुर गुर भरत भुआलू। राम बिरहँ सबु साजु बिहालू।।
मूल पाठ
मुनि महिसुर गुर भरत भुआलू। राम बिरहँ सबु साजु बिहालू।।
प्रभु गुन ग्राम गनत मन माहीं। सब चुपचाप चले मग जाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.322 · पुस्तक पृ. 613, 613
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुनि, ब्राह्मण, गुरु वसिष्ठजी, भरतजी और राजा जनकजी—सारा समाज श्रीरामचन्द्रजीके विरहमें विह्वल है। प्रभुके गुणसमूहोंका मनमें स्मरण करते हुए सब लोग मार्गमें चुपचाप चले जा रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 613 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मुनि महिसुर गुर भरत भुआलू। राम बिरहँ सबु साजु बिहालू।।
English explanation
AI draft: The sages, Brahmins, the preceptor, Bharata, and King Janaka—the entire company—were distraught at separation from Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि; तपस्वी | sages |
| महिसुर | ब्राह्मण | Brahmins |
| गुर | गुरु वसिष्ठ | the preceptor Vasishtha |
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| भुआलू | राजा; यहाँ जनक | the king; here, Janaka |
| राम | श्रीराम | Rama |
| बिरहँ | विरह में; बिछोह से | in separation; because of separation |
| सबु | समस्त | the entire |
| साजु | साथ आया दल | accompanying company |
| बिहालू | व्याकुल | distraught |
2 प्रभु गुन ग्राम गनत मन माहीं। सब चुपचाप चले मग जाहीं।।
English explanation
All went silently along the road, recounting the Lord’s many virtues in their minds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | the Lord, Rama |
| गुन | गुण | virtues |
| ग्राम | समूह | multitude |
| गनत | गिनते; स्मरण करते हुए | recounting; recalling |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | within |
| सब | सभी | all |
| चुपचाप | मौन रहकर | silently |
| चले | चलते हुए | proceeding |
| मग | मार्ग पर | along the road |
| जाहीं | जा रहे थे | were going |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.322
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 613
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 613, 613
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।