अयोध्याकाण्ड · दोहा 321 · दोहा/सोरठा
सानुज सीय समेत प्रभु राजत परन कुटीर।
सानुज सीय समेत प्रभु राजत परन कुटीर।
भगति ग्यानु बैराग्य जनु सोहत धरें सरीर।।321।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.321 · पुस्तक पृ. 612, 613
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सानुज सीय समेत प्रभु राजत परन कुटीर।
छोटे भाई और सीता सहित प्रभु राम पत्तों की कुटिया में सुशोभित हैं।
English explanation
Lord Rama shines in the leaf hut together with his younger brother and Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सानुज | छोटे भाई सहित | with his younger brother |
| सीय | सीता | Sita |
| समेत | सहित | together with |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| राजत | सुशोभित हैं | shines resplendently |
| परन | पत्तों की | of leaves |
| कुटीर | कुटिया में | in the hut |
2 भगति ग्यानु बैराग्य जनु सोहत धरें सरीर।।321।।
मानो भक्ति, ज्ञान और वैराग्य शरीर धारण करके सुशोभित हो रहे हों।
English explanation
It is as though devotion, knowledge, and detachment have taken bodily form and shine there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगति | भक्ति | devotion |
| ग्यानु | ज्ञान | knowledge |
| बैराग्य | वैराग्य | detachment |
| जनु | मानो | as though |
| सोहत | सुशोभित हैं | shine beautifully |
| धरें | धारण किए हुए | having assumed |
| सरीर | शरीर | bodily form |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 321
- स्रोत अभिलेख
- 2.321
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 612, 613
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