अयोध्याकाण्ड · दोहा 322 · दोहा/सोरठा
राम दरस लगि लोग सब करत नेम उपबास।
राम दरस लगि लोग सब करत नेम उपबास।
तजि तजि भूषन भोग सुख जिअत अवधि कीं आस।।322।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.322 · पुस्तक पृ. 613, 613
भावार्थ और शब्दार्थ
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1राम दरस लगि लोग सब करत नेम उपबास।
राम के दर्शन के लिए सभी लोग नियमों और उपवासों का पालन करते थे।
English explanation
All the people observed religious disciplines and fasts in the hope of seeing Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | of Rama |
| दरस | दर्शन | the sight; seeing |
| लगि | के लिए | for; with a view to |
| लोग | लोग | people |
| सब | सभी | all |
| करत | करते थे; पालन करते थे | practised; observed |
| नेम | धार्मिक नियम और व्रत | religious disciplines and vows |
| उपबास | उपवास | fasts |
2 तजि तजि भूषन भोग सुख जिअत अवधि कीं आस।।322।।
आभूषण, भोग और सुख छोड़-छोड़कर वे राम के वनवास की निश्चित अवधि पूरी होने की आशा में जीते थे।
English explanation
Giving up ornaments, enjoyments, and comforts, they lived in the hope that the appointed term of Rama’s exile would end.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तजि | त्यागकर | giving up |
| तजि | त्यागकर | giving up |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| भोग | भोग-विलास | enjoyments; luxuries |
| सुख | सुख-सुविधाएँ | comforts |
| जिअत | जीते थे | lived |
| अवधि | निश्चित अवधि; राम के वनवास की अवधि | the appointed term of Rama’s exile |
| कीं | की | of; concerning |
| आस | आशा; अवधि पूरी होने की उम्मीद | hope; expectation of the term’s completion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 322
- स्रोत अभिलेख
- 2.322
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 613, 613
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