अयोध्याकाण्ड · दोहा 323 · दोहा/सोरठा
सुनि सिख पाइ असीस बड़ि गनक बोलि दिनु साधि।
सुनि सिख पाइ असीस बड़ि गनक बोलि दिनु साधि।
सिंघासन प्रभु पादुका बैठारे निरुपाधि।।323।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.323 · पुस्तक पृ. 613, 614
भावार्थ और शब्दार्थ
1सुनि सिख पाइ असीस बड़ि गनक बोलि दिनु साधि।
उपदेश सुनकर और बड़ा आशीर्वाद पाकर भरत ने ज्योतिषियों को बुलाया और शुभ दिन निश्चित कराया।
English explanation
Having heard the counsel and received a great blessing, Bharata summoned astrologers and had an auspicious day determined.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सिख | उपदेश | counsel |
| पाइ | पाकर | having received |
| असीस | आशीर्वाद | blessing |
| बड़ि | बड़ा; महान | great |
| गनक | ज्योतिषियों को | astrologers |
| बोलि | बुलाकर | having summoned |
| दिनु | शुभ दिन | an auspicious day |
| साधि | निश्चित कराकर | having had determined |
2 सिंघासन प्रभु पादुका बैठारे निरुपाधि।।323।।
भरत ने निष्कपट भाव से प्रभु राम की पादुकाएँ सिंहासन पर प्रतिष्ठित कीं।
English explanation
Bharata sincerely installed Lord Rama’s sandals on the throne, without ulterior motive.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिंघासन | सिंहासन पर | on the throne |
| प्रभु | प्रभु राम की | of Lord Rama |
| पादुका | पादुकाएँ; खड़ाऊँ | sandals |
| बैठारे | प्रतिष्ठित कीं; बैठाईं | installed; placed |
| निरुपाधि | निष्कपट भाव से; बिना छल के | sincerely; without ulterior motive |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 323
- स्रोत अभिलेख
- 2.323
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 613, 614
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