अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जमुना उतरि पार सबु भयऊ। सो बासरु बिनु भोजन गयऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[पहले दिन] सब लोग यमुनाजी उतरकर पार हुए। वह दिन बिना भोजनके ही बीत गया। दूसरा मुकाम गङ्गाजी उतरकर (गङ्गापार शृङ्गवेरपुरमें) हुआ। वहाँ रामसखा निषादराजने सब सुप्रबन्ध कर दिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 613 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जमुना उतरि पार सबु भयऊ। सो बासरु बिनु भोजन गयऊ।।
उतरि देवसरि दूसर बासू। रामसखाँ सब कीन्ह सुपासू।।
स्रोत अभिलेख 2.322 · पुस्तक पृ. 613, 613
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जमुना उतरि पार सबु भयऊ। सो बासरु बिनु भोजन गयऊ।।
English explanation
The entire company crossed the Yamuna and reached the other bank. That day passed without food.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जमुना | यमुना नदी | the Yamuna River |
| उतरि | पार करके | having crossed |
| पार | उस पार | on the other bank |
| सबु | पूरा दल | the whole company |
| भयऊ | हो गया; पहुँच गया | was; had reached |
| सो | वह | that |
| बासरु | दिन | day |
| बिनु | बिना | without |
| भोजन | भोजन | food |
| गयऊ | बीत गया | passed |
2 उतरि देवसरि दूसर बासू। रामसखाँ सब कीन्ह सुपासू।।
English explanation
After crossing the Ganga, they made their second halt. Rama’s friend Guha made suitable arrangements for everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उतरि | पार करके | having crossed |
| देवसरि | देवनदी गंगा | the Ganga, the divine river |
| दूसर | दूसरा | second |
| बासू | पड़ाव; ठहराव | halt; encampment |
| रामसखाँ | राम के सखा गुह ने | Rama’s friend Guha |
| सब | सबके लिए | for everyone |
| कीन्ह | किया | made |
| सुपासू | अच्छी आवास और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था | suitable lodging and provisions |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.322
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 613
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 613, 613
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।