अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि प्रभाउ जब भरत बिलोका। सब लघु लगे लोकपति लोका।।
मूल पाठ
मुनि प्रभाउ जब भरत बिलोका। सब लघु लगे लोकपति लोका।।
सुख समाजु नहिं जाइ बखानी। देखत बिरति बिसारहीं ग्यानी।।
स्रोत अभिलेख 2.215 · पुस्तक पृ. 522, 522
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब भरतजीने मुनिके प्रभावको देखा तो उसके सामने उन्हें [इन्द्र, वरुण, यम, कुबेर आदि] सभी लोकपालोंके लोक तुच्छ जान पड़े। सुखकी सामग्रीका वर्णन नहीं हो सकता, जिसे देखकर ज्ञानीलोग भी वैराग्य भूल जाते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 522 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मुनि प्रभाउ जब भरत बिलोका। सब लघु लगे लोकपति लोका।।
English explanation
When Bharata saw the sage’s power, all the realms of the guardians of the worlds seemed insignificant to him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि भरद्वाज का | of the sage Bharadvaja |
| प्रभाउ | प्रभाव; सामर्थ्य | power; extraordinary capability |
| जब | जब | when |
| भरत | राम के भाई भरत ने | Bharata, Rama’s brother |
| बिलोका | देखा | saw |
| सब | सभी | all |
| लघु | तुच्छ; छोटे | insignificant; small |
| लगे | प्रतीत हुए | seemed |
| लोकपति | लोकों के अधिपतियों के | of the guardians of the worlds |
| लोका | लोक; निवास-क्षेत्र | realms; abodes |
2 सुख समाजु नहिं जाइ बखानी। देखत बिरति बिसारहीं ग्यानी।।
English explanation
That array of comforts cannot be described; seeing it, even the wise forget their detachment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुख | सुख की | of comfort and pleasure |
| समाजु | सामग्रियों का समूह | array of provisions |
| नहिं | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| बखानी | वर्णन किया | described |
| देखत | देखते ही | on seeing |
| बिरति | वैराग्य; अनासक्ति | detachment; dispassion |
| बिसारहीं | भूल जाते हैं | forget |
| ग्यानी | ज्ञानी लोग | the wise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.215
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 522
- सहायक विषय
- भरद्वाजद्वारा भरतका सत्कार
- मुद्रित पृष्ठ
- 522, 522
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।