अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि पूँछब कछु यह बड़ सोचू। बोले रिषि लखि सीलु सँकोचू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउनके मनमें यह बड़ा सोच है कि मुनि कुछ पूछेंगे [तो मैं क्या उत्तर दूँगा]। भरतजीके शील और संकोचको देखकर ऋषि बोले—भरत! सुनो, हम सब खबर पा चुके हैं। विधाताके कर्तव्यपर कुछ वश नहीं चलता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 515 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मुनि पूँछब कछु यह बड़ सोचू। बोले रिषि लखि सीलु सँकोचू।।
सुनहु भरत हम सब सुधि पाई। बिधि करतब पर किछु न बसाई।।
स्रोत अभिलेख 2.206 · पुस्तक पृ. 514, 515
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मुनि पूँछब कछु यह बड़ सोचू। बोले रिषि लखि सीलु सँकोचू।।
English explanation
Bharata was deeply anxious that the sage might ask him something. Observing his modest character and diffidence, the sage spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि | the sage |
| पूँछब | पूछेंगे | will ask |
| कछु | कुछ | something |
| यह | यह | this |
| बड़ | बड़ी | great |
| सोचू | चिंता | anxiety |
| बोले | बोले | spoke |
| रिषि | ऋषि भरद्वाज | the sage Bharadvaja |
| लखि | देखकर, समझकर | perceiving |
| सीलु | विनम्र सदाचारी स्वभाव | modest, virtuous character |
| सँकोचू | संकोच | diffidence |
2 सुनहु भरत हम सब सुधि पाई। बिधि करतब पर किछु न बसाई।।
English explanation
The sage said: Listen, Bharata, I have learned all that happened. No one has any control over the workings of destiny.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनो | listen |
| भरत | हे भरत | Bharata |
| हम | हमने, मैंने | I |
| सब | सारी | all |
| सुधि | खबर, जानकारी | news, information |
| पाई | प्राप्त की | have received |
| बिधि | विधाता के | of destiny’s ordainer |
| करतब | कार्य, विधान | workings |
| पर | पर | over |
| किछु | कुछ भी | any |
| न | नहीं | no |
| बसाई | वश, नियंत्रण | control |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.206
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 515
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 514, 515
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।