अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि कहुँ राम दंडवत कीन्हा। आसिरबादु बिप्रबर दीन्हा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीने मुनिको दण्डवत् किया। विप्रश्रेष्ठ मुनिने उन्हें आशीर्वाद दिया। श्रीरामचन्द्रजीकी छवि देखकर मुनिके नेत्र शीतल हो गये। सम्मानपूर्वक मुनि उन्हें आश्रममें ले आये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 447 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मुनि कहुँ राम दंडवत कीन्हा। आसिरबादु बिप्रबर दीन्हा।।
देखि राम छबि नयन जुड़ाने। करि सनमानु आश्रमहिं आने।।
स्रोत अभिलेख 2.125 · पुस्तक पृ. 447, 448
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मुनि कहुँ राम दंडवत कीन्हा। आसिरबादु बिप्रबर दीन्हा।।
English explanation
AI draft: Rama bowed prostrate before the sage, and the eminent Brahmin sage blessed him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि वाल्मीकि को | the sage Valmiki |
| कहुँ | को | to |
| राम | राम ने | Rama |
| दंडवत | भूमि पर लेटकर प्रणाम | a prostrate bow |
| कीन्हा | किया | performed |
| आसिरबादु | आशीर्वाद | a blessing |
| बिप्रबर | श्रेष्ठ ब्राह्मण मुनि ने | the eminent Brahmin sage |
| दीन्हा | दिया | gave |
2 देखि राम छबि नयन जुड़ाने। करि सनमानु आश्रमहिं आने।।
English explanation
Seeing Rama's beautiful form, the sage's eyes were soothed and satisfied; he welcomed them respectfully and brought them into the hermitage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | on seeing |
| राम | राम की | Rama's |
| छबि | सुंदर छवि | beautiful appearance |
| नयन | नेत्र | eyes |
| जुड़ाने | शीतल और तृप्त हुए | were soothed and satisfied |
| करि | करके | having offered |
| सनमानु | आदर-सत्कार | a respectful welcome |
| आश्रमहिं | आश्रम में | into the hermitage |
| आने | ले आए | brought them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.125
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 447
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 447, 448
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।